मंदिर ज्ञानमंदिर में नंदी शिवलिंग की तरफ मुख करके क्यों बैठता है?परम भक्त (सदा शिव दर्शन), द्वारपाल (सुरक्षा), धर्म प्रतीक (धर्म→ईश्वर), ध्यानमग्न (आदर्श साधक), श्रवण (तंत्र ग्रहण)। भक्त: नंदी कान में मनोकामना → शिव तक।#नंदी#शिवलिंग#मुख
स्तोत्र एवं पाठचालीसा पाठ में बैठने का सही तरीकाआसन (कुशा/ऊन/सूती) पर, पूर्व/उत्तर मुख, सुखासन, रीढ़ सीधी, माला दाहिने हाथ। जमीन/बिस्तर/जूते=वर्जित। भाव > आसन।#चालीसा#बैठना#आसन
पूजा विधिपूजा में बैठने का सही तरीका क्या है?पूजा में बैठना: आसन पर (भूमि पर नहीं)। रीढ़ सीधी — सर्वाधिक महत्वपूर्ण। सुखासन (पालथी) सबसे सुलभ। पूर्व या उत्तर मुख। कुर्सी पर भी बैठ सकते हैं — रीढ़ सीधी रखें। गीता 6.11: 'मन एकाग्र, आसन स्थिर।'#बैठना#आसन#मुद्रा
पूजा विधिपूजा में किस दिशा में बैठना चाहिए?पूजा में दिशा: पूर्व मुख — सर्वोत्तम (सूर्य की दिशा, ज्ञान और प्रकाश)। उत्तर मुख — कुबेर और ध्रुव की दिशा (दूसरा विकल्प)। दक्षिण मुख — पितृ तर्पण में; देव पूजा में वर्जित। भाव और श्रद्धा दिशा से अधिक महत्वपूर्ण है।#दिशा#बैठना#पूर्व
मंदिर ज्ञानमंदिर में पैर फैलाकर क्यों नहीं बैठना चाहिए?अपमान (पैर=नीचा), ऊर्जा leak, योग (ऊर्ध्व=सुखासन), शिष्टाचार। सही: सुखासन/वज्रासन/खड़े। पैर=मूर्ति विपरीत। बीमार/वृद्ध = जैसे संभव — भगवान समझते हैं।#पैर#फैलाना#नहीं