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वायव्य शरीर से जुड़े सभी प्रश्न(5)

वायव्य शरीर पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 5 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

गरुड़ पुराण में प्रेत योनि के बारे में क्या कहा गया है?

गरुड़ पुराण प्रेत को वायव्य शरीर, तीव्र भूख-प्यास और पिण्डदान के अभाव से उत्पन्न दुखद अवस्था बताता है।

#गरुड़ पुराण#प्रेत योनि#पिण्डदान
लोक

प्रेत कुछ खा-पी क्यों नहीं सकता?

प्रेत के पास मुख, गला और आमाशय वाला स्थूल शरीर नहीं होता, इसलिए वह भूख-प्यास होने पर भी खा-पी नहीं सकता।

#प्रेत#भूख प्यास#वायव्य शरीर
लोक

प्रेत को भूख-प्यास क्यों लगती है?

प्रेत को सूक्ष्म शरीर में भूख-प्यास का अनुभव रहता है, पर भौतिक शरीर न होने से वह अन्न-जल ग्रहण नहीं कर पाता।

#प्रेत भूख प्यास#प्रेत योनि#अतृप्ति
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प्रेत योनि में जीव को कैसा शरीर मिलता है?

प्रेत को वायु तत्व से बना वायव्य सूक्ष्म शरीर मिलता है, जिसमें वह भूख-प्यास और अतृप्ति की पीड़ा अनुभव करता है।

#प्रेत शरीर#वायव्य शरीर#सूक्ष्म शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

वायुजा देह अग्नि रहित शिखा जैसी क्यों कही गई है?

वायुजा देह वायव्य, अस्थूल और कर्म-अक्षम होती है, इसलिए उसे अग्नि रहित शिखा जैसी कहा गया है।

#वायुजा देह#अग्नि रहित शिखा#वायव्य शरीर
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