लोकगरुड़ पुराण में प्रेत योनि के बारे में क्या कहा गया है?गरुड़ पुराण प्रेत को वायव्य शरीर, तीव्र भूख-प्यास और पिण्डदान के अभाव से उत्पन्न दुखद अवस्था बताता है।#गरुड़ पुराण#प्रेत योनि#पिण्डदान
लोकप्रेत कुछ खा-पी क्यों नहीं सकता?प्रेत के पास मुख, गला और आमाशय वाला स्थूल शरीर नहीं होता, इसलिए वह भूख-प्यास होने पर भी खा-पी नहीं सकता।#प्रेत#भूख प्यास#वायव्य शरीर
लोकप्रेत को भूख-प्यास क्यों लगती है?प्रेत को सूक्ष्म शरीर में भूख-प्यास का अनुभव रहता है, पर भौतिक शरीर न होने से वह अन्न-जल ग्रहण नहीं कर पाता।#प्रेत भूख प्यास#प्रेत योनि#अतृप्ति
लोकप्रेत योनि में जीव को कैसा शरीर मिलता है?प्रेत को वायु तत्व से बना वायव्य सूक्ष्म शरीर मिलता है, जिसमें वह भूख-प्यास और अतृप्ति की पीड़ा अनुभव करता है।#प्रेत शरीर#वायव्य शरीर#सूक्ष्म शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रावायुजा देह अग्नि रहित शिखा जैसी क्यों कही गई है?वायुजा देह वायव्य, अस्थूल और कर्म-अक्षम होती है, इसलिए उसे अग्नि रहित शिखा जैसी कहा गया है।#वायुजा देह#अग्नि रहित शिखा#वायव्य शरीर