दोष निवारणवास्तु दोष दूर करने का सिद्ध वास्तु मंत्रघर के वास्तु दोषों को बिना तोड़-फोड़ के शांत करने के लिए ईशान कोण में बैठकर 'ॐ वास्तु पुरुषाय नमः' या वैदिक वास्तु मंत्र का नियमित जप करना सर्वोत्तम उपाय है।#वास्तु दोष#वास्तु पुरुष#शांति
वास्तु शास्त्रवास्तु पुरुष कौन है और वास्तु मंडल क्या हैवास्तु पुरुष भूमि का अधिष्ठाता देवता है जो औंधे मुख (सिर ईशान, पैर नैऋत्य) लेटा है। वास्तु मंडल 81 पद (9×9) का ग्रिड है जिसमें 45 देवता विभिन्न स्थानों पर विराजमान हैं — केंद्र में ब्रह्मा। इसी के आधार पर भवन निर्माण किया जाता है।
वास्तु शास्त्रभूमि पूजन में कौन से देवताओं की पूजा करेंभूमि पूजन में गणेश, भूमि देवी (पृथ्वी माता), वास्तु पुरुष, अष्ट दिक्पाल (इंद्र, अग्नि, यम, निऋति, वरुण, वायु, कुबेर, ईशान), नवग्रह, नाग देवता और विश्वकर्मा की पूजा करें। ईशान कोण से आरंभ करें।#भूमि पूजन#वास्तु पुरुष#निर्माण
मंदिर वास्तुमंदिर के वास्तु में ब्रह्मस्थान का क्या अर्थ है?ब्रह्मस्थान = वास्तु का ऊर्जात्मक केन्द्र बिन्दु। वास्तु पुरुष का नाभि स्थान। मंदिर: गर्भगृह = ब्रह्मस्थान — ऊर्जा यहाँ से सम्पूर्ण मंदिर में। मूर्ति ठीक यहाँ। शिखर = ऊपर से ऊर्जा ग्रहण → गर्भगृह में। नियम: शुद्ध/खाली रखें — शौचालय/कूड़ा=पूर्णतः वर्जित। घर: केन्द्र खुला+तुलसी/दीपक।#ब्रह्मस्थान#वास्तु पुरुष#केन्द्र बिन्दु
मंदिर वास्तुमंदिर की वास्तु में वास्तु पुरुष मंडल का क्या अर्थ है?दिव्य पुरुष भूमि पर लेटा = 81/64 खाने = मंडल। केंद्र (पेट) = ब्रह्मस्थान = गर्भगृह। ईशान (शिर) = शुभ (जल/पूजा)। नैऋत्य (पैर) = स्थिर। हर मंदिर/घर = मंडल अनुसार।#वास्तु पुरुष#मंडल#अर्थ