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विशिष्टाद्वैत से जुड़े सभी प्रश्न(4)

विशिष्टाद्वैत पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

दर्शन

विशिष्टाद्वैत क्या है रामानुज के अनुसार?

विशिष्टाद्वैत (रामानुज, 1017-1137): ब्रह्म एक पर सगुण। जीव+जगत = ब्रह्म के विशेषण/अंग (वृक्ष-शाखा, सूर्य-किरण)। जगत सत्य (मिथ्या नहीं)। मोक्ष = भक्ति/प्रपत्ति से, वैकुंठ में नारायण सेवा। शंकर के मायावाद का खंडन।

#विशिष्टाद्वैत#रामानुज#योग्य अद्वैत
वेदांत दर्शन

विशिष्टाद्वैत वेदांत में विष्णु का क्या स्थान है?

विशिष्टाद्वैत (रामानुजाचार्य): नारायण = सर्वोच्च सगुण परब्रह्म (अनंत कल्याणकारी गुण)। जगत मिथ्या नहीं — सत्य है। जीव और जगत = नारायण का शरीर। नारायण = आत्मा, ब्रह्मांड = उनका शरीर। 'Qualified Non-Dualism'।

#विशिष्टाद्वैत#रामानुजाचार्य#सगुण नारायण
वेद एवं उपनिषद

वेदांत दर्शन के तीन प्रमुख मत कौन से हैं?

वेदांत के तीन प्रमुख मत हैं — शंकराचार्य का अद्वैत (ब्रह्म ही सत्य, जगत माया), रामानुजाचार्य का विशिष्टाद्वैत (जीव और जगत ब्रह्म के शरीर) और मध्वाचार्य का द्वैत (ब्रह्म और जीव सदा भिन्न)।

#वेदांत#अद्वैत#विशिष्टाद्वैत
भक्ति एवं आध्यात्म

प्रपत्ति क्या है वैष्णव परंपरा में

प्रपत्ति = परम शरणागति। रामानुज के विशिष्टाद्वैत दर्शन में यह मोक्ष का सरलतम मार्ग है। गीता 18.66 इसका आधार है। मार्जार-किशोर-न्याय इसका प्रतीक है — बिल्ली का बच्चा निश्चिंत है, माँ स्वयं उठाती है।

#प्रपत्ति#शरणागति#वैष्णव
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