जीवन एवं मृत्युप्रेत से पितृ बनने की प्रक्रिया क्या है?प्रेत से पितर बनने की प्रक्रिया — दाह-संस्कार → दशगात्र → एकादशाह → षोडश श्राद्ध → मासिक श्राद्ध → सपिंडीकरण (यहाँ प्रेत 'पितर' बनता है) → गया श्राद्ध (परम गति)। सपिंडीकरण इस यात्रा का निर्णायक पड़ाव है।#प्रेत से पितर#प्रक्रिया#सपिंडीकरण
जीवन एवं मृत्युसपिंडीकरण की प्रक्रिया कैसे होती है?सपिंडीकरण — एक वर्ष बाद। एक प्रेत-पिंड को तीन पितृ-पिंडों में मिलाना (पिंड-मेलन)। ब्राह्मण-भोजन, 12 घट, शुद्धि और शय्यादान। इसके बाद प्रेत 'पितर' बन जाता है — प्रेतत्व समाप्त।#सपिंडीकरण
जीवन एवं मृत्युसपिंडीकरण से क्या होता है?सपिंडीकरण से — प्रेत 'पितर' बन जाता है, प्रेत-शरीर से मुक्ति मिलती है, पारिवारिक पितर-श्रेणी में प्रवेश होता है और धर्मराज की सभा में आदरपूर्ण स्थान मिलता है।#सपिंडीकरण#प्रेत से पितर#मुक्ति
जीवन एवं मृत्युसपिंडीकरण क्या है?सपिंडीकरण = मृत्यु के एक वर्ष बाद किया जाने वाला वह श्राद्ध जिसमें 'प्रेत' के पिंड को तीन पितरों के पिंड में मिलाकर उसे 'पितर' की श्रेणी में सम्मिलित किया जाता है। यह प्रेतत्व से मुक्ति का अंतिम और निर्णायक संस्कार है।#सपिंडीकरण#पितर#वार्षिक श्राद्ध