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सर्वपितृ अमावस्या से जुड़े सभी प्रश्न(12)

सर्वपितृ अमावस्या पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 12 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्राद्ध विधि

श्राद्ध की तिथि भूल जाएं तो क्या करें?

सर्वपितृ अमावस्या (पितृ पक्ष अंतिम दिन) को श्राद्ध करें — सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के लिए। पिता=अष्टमी, माता=नवमी, अकाल मृत्यु=चतुर्दशी। तिल-जल तर्पण + पिंडदान + ब्राह्मण भोजन।

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लोक

सर्वपितृ अमावस्या क्या है?

सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के श्राद्ध की अमावस्या सर्वपितृ अमावस्या है।

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लोक

अज्ञात मृत्यु तिथि का श्राद्ध कब करें?

अज्ञात तिथि वाले पितरों का श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या को करें।

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विशेष मृत्यु श्राद्ध

सर्वपितृ अमावस्या क्या है?

सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन है, जो आश्विन कृष्ण अमावस्या को होता है। इसे महालया अमावस्या भी कहते हैं। सर्वपितृ का अर्थ सभी पितरों की अमावस्या है। इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि पूर्णतः विस्मृत हो चुकी हो।

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विशेष मृत्यु श्राद्ध

मृत्यु तिथि याद न हो तो श्राद्ध कब करें?

जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि पूर्णतः विस्मृत हो चुकी हो, उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या या महालया अमावस्या को किया जाता है। यह आश्विन कृष्ण अमावस्या है, जो पितृ पक्ष का अंतिम और सबसे पवित्र दिन है।

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पितृ पक्ष

पितृ पक्ष कब समाप्त होता है?

पितृ पक्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) पर समाप्त होता है। इसे महालया अमावस्या भी कहते हैं। यह उन पूर्वजों के श्राद्ध का दिन है जिनकी मृत्यु तिथि याद नहीं।

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लोक

सर्वपितृ अमावस्या किसके लिए होती है?

जिन पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या को किया जाता है।

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पितृ पक्ष कब आता है और इसका महत्व क्या है?

भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक पितृ पक्ष होता है, जब पितृलोक पृथ्वी के निकट माना जाता है।

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तिथि नियम

अगर पूर्वजों की मृत्यु की तिथि (तारीख) याद न हो तो श्राद्ध कब करें?

अगर आपको अपने माता-पिता या पूर्वजों की मृत्यु की तारीख (तिथि) बिल्कुल याद नहीं है, तो पितृ पक्ष के आखिरी दिन यानी 'सर्वपितृ अमावस्या' को उनका श्राद्ध करना चाहिए।

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विशेष अमावस्या

सर्वपितृ अमावस्या का क्या महत्व है?

यह पितृ पक्ष का आखिरी दिन होता है। जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि याद न हो, उनका श्राद्ध इसी दिन किया जाता है। इससे सभी भूले-बिसरे पितर खुश हो जाते हैं।

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श्राद्ध एवं पितृ कर्म

पितृपक्ष में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व

पितृपक्ष अंतिम दिन = सभी पितरों का श्राद्ध। तिथि अज्ञात/अकाल मृत्यु = इसी दिन। 15 दिन न कर पाएं तो कम से कम यही करें। सर्वमान्य, सर्वस्वीकृत। तिल-जल तर्पण + ब्राह्मण/गरीब भोज + दान।

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श्राद्ध-पितृ कर्म

पितृ विसर्जनी अमावस्या पर तर्पण कैसे करें?

सर्वपितृ अमावस्या तर्पण: आश्विन अमावस्या (पितृ पक्ष अंतिम)। सभी पितरों हेतु। विधि: कुतप काल → दक्षिण मुख → अपसव्य → तिल-जौ-कुश-जल तर्पण (प्रति पितर 3 बार) → पिण्डदान → ब्राह्मण भोज → कौवा-गाय-कुत्ते को भोजन → दान। गया सर्वश्रेष्ठ।

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