मंत्र जपमंत्र जप के दौरान कौन सा आसन उपयोग करें?जप के लिए: सिद्धासन (सर्वोत्तम — ऊर्जा ऊर्ध्वगामी), पद्मासन (द्वितीय), सुखासन (सामान्य)। नीचे: ऊनी कम्बल/कुशासन (प्लास्टिक वर्जित)। रीढ़ सीधी, माला गोमुखी में। पातञ्जल: स्थिर और सुखद आसन। पूरे अनुष्ठान में एक ही आसन।#जप आसन#पद्मासन#सिद्धासन
साधना आसनतंत्र साधना में कौन सा आसन उपयोग करें?तंत्र आसन: मृगचर्म (सर्वश्रेष्ठ), व्याघ्रचर्म (भैरव), कुश (सामान्य)। मुद्रा: सिद्धासन (तंत्र ध्यान), पद्मासन (कुंडलिनी), वीरासन (भैरव)। भूमि पर सीधे नहीं। कुलार्णव: 'आसने सिद्धे सिद्धिः।'
जप आसनमंत्र जप करते समय कौन सा आसन सही है?जप आसन: कुश या ऊनी — भूमि पर सीधे नहीं (ऊर्जा absorb हो जाती है)। मुद्रा: सिद्धासन या सुखासन — रीढ़ सीधी। गीता 6.11: 'न अधिक ऊँचा, न नीचा, स्थिर।' एक ही आसन नित्य उपयोग करें — सिद्ध होता है।#आसन#कुश#पद्मासन
ध्यान साधनाध्यान करते समय कौन सा आसन सबसे अच्छा है?ध्यान के लिए सर्वश्रेष्ठ आसन — पद्मासन (सर्वव्याधिनाशक) और सिद्धासन (प्राण-संरक्षक)। नए साधकों के लिए सुखासन उपयुक्त। योगसूत्र (2/46) — 'स्थिरसुखमासनम्' — स्थिर और सुखदायी बैठना ही आसन है। गीता (6/13) — रीढ़, गर्दन और सिर सीधे रखें।#आसन#ध्यान#पद्मासन