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क्या है

महामृत्युंजय क्या है?(9)

महामृत्युंजय का अर्थमहामृत्युंजय क्या है?महामृत्युंजय का महत्व
सरल उत्तर

तीन शक्तियां — काशी क्षेत्र (करोड़ों गुना फल), शिवगण-ऊर्जान्वित लिंग, और प्राण-दिशा (वायव्य कोण)। गुप्त नाद-ऊर्जा मंत्रों को बहुगुणित करती है। अष्टमेश-मारकेश दशा के अरिष्ट योग खंडित होते हैं।

स्रोत प्रश्न: शंकुकर्णेश्वर महादेव के सान्निध्य में महामृत्युंजय अनुष्ठान का विशेष महत्व क्या है? →
शिव मंत्र

संजीवनी मंत्र क्या है और इसका जप कैसे करें?

संजीवनी मंत्र = महामृत्युंजय का नाम (मृत-संजीवनी)। मार्कंडेय ने मृत्यु जीती। 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...' ऋग्वेद 7.59.12। रुद्राक्ष माला, 108 नित्य, सोमवार। रोगी पास जप = लाभ। सवा लाख + हवन। शिवलिंग अभिषेक + जप।

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शिव-नाग संयुक्त मंत्र (संपुट प्रयोग)

रुद्र-सर्प संपुट क्या होता है?

रुद्र-सर्प संपुट में एक क्रम होता है: महामृत्युंजय मंत्र + सर्प सूक्त (तीनों श्लोक) + महामृत्युंजय मंत्र — यह एक संपुट है। कालसर्प के लिए 11, 21 या 108 संपुट का पाठ करते हैं।

#रुद्र सर्प संपुट#महामृत्युंजय#सर्प सूक्त
शिव-नाग संयुक्त मंत्र (संपुट प्रयोग)

शिव-नाग संयुक्त दिव्य मंत्र क्या है?

शिव-नाग संयुक्त दिव्य मंत्र कोई एक मंत्र नहीं बल्कि महामृत्युंजय मंत्र (काल निवारण) और सर्प सूक्त (सर्प निवारण) का संपुट प्रयोग है।

#शिव नाग संयुक्त मंत्र#संपुट#महामृत्युंजय
काशी के शिवलिंग

शंकुकर्णेश्वर महादेव के सान्निध्य में महामृत्युंजय अनुष्ठान का विशेष महत्व क्या है?

तीन शक्तियां — काशी क्षेत्र (करोड़ों गुना फल), शिवगण-ऊर्जान्वित लिंग, और प्राण-दिशा (वायव्य कोण)। गुप्त नाद-ऊर्जा मंत्रों को बहुगुणित करती है। अष्टमेश-मारकेश दशा के अरिष्ट योग खंडित होते हैं।

#शंकुकर्णेश्वर#महामृत्युंजय#अनुष्ठान
मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र का शब्दशः अर्थ क्या है

ऋग्वेद 7.59.12: 'हम तीन नेत्रधारी (शिव), सुगंधित, पोषक की पूजा करते हैं। जैसे पका फल डंठल से स्वतः मुक्त हो, वैसे हमें मृत्यु से मुक्त करें, अमृत (मोक्ष) दें।' प्रतीक: मृत्यु = प्राकृतिक, कष्टरहित (पके फल जैसी)। दीर्घायु और मोक्ष का सर्वशक्तिमान मंत्र।

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मंत्र ज्ञान

शिव जी का महामृत्युंजय मंत्र क्या है?

महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद 7.59.12 का है — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...'। अर्थ: तीन नेत्रों वाले शिव हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें जैसे खीरा पककर बेल से स्वतः अलग होता है। यह भारतीय परंपरा का सर्वश्रेष्ठ रोग-मृत्यु रक्षा मंत्र है।

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मंत्र ज्ञान

शिव जी का महामृत्युंजय मंत्र क्या है?

महामृत्युंजय मंत्र है — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥' यह ऋग्वेद (7.59.12) का मंत्र है। अर्थ — तीन नेत्रों वाले शिव हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें।

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हवन/यज्ञ

महामृत्युंजय हवन की विधि और सामग्री क्या है?

'ॐ त्र्यम्बकं...स्वाहा'। सामग्री: घी+तिल+जौ+दूर्वा+बिल्व+धतूरा+चंदन। 1,25,000 (पूर्ण) / 108 (सरल)। कब: रोग, दुर्घटना, शनि, दीर्घायु। श्वेत, रुद्राक्ष। पुरोहित=अनुशंसित।

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यंत्र

महामृत्युंजय यंत्र स्थापित करने की विधि क्या है?

सोमवार/शिवरात्रि/श्रावण। गंगाजल+पंचामृत शुद्धि। पूर्व/उत्तर दिशा। बिल्वपत्र, दूध। प्राण प्रतिष्ठा + महामृत्युंजय 108। नित्य जलाभिषेक+11/21 जप। लाभ: मृत्यु भय, रोग, ग्रह शांति, दीर्घायु।

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