संकर्षण की अग्नि (कालानल) भगवान शेषनाग के मुख से नैमित्तिक प्रलय में उत्पन्न होती है। यह पाताल से ऊपर उठकर त्रैलोक्य को भस्म करती है और महर्लोक तक ताप पहुँचाती है।
संकर्षण की अग्नि (कालानल) भगवान शेषनाग के मुख से नैमित्तिक प्रलय में उत्पन्न होती है। यह पाताल से ऊपर उठकर त्रैलोक्य को भस्म करती है और महर्लोक तक ताप पहुँचाती है।