विस्तृत उत्तर
मंत्र जप के समय दीपक प्रज्वलित करना अनिवार्य है क्योंकि अग्नि को देवताओं का मुख और 'साक्षी' माना गया है। दीपक की लौ इस बात का प्रमाण होती है कि आपने साधना की है। आध्यात्मिक रूप से, दीपक अंधकार (अज्ञान) को मिटाकर प्रकाश (ज्ञान) की ओर ले जाने का प्रतीक है। वैज्ञानिक दृष्टि से, घी या तेल के जलने से निकलने वाली तरंगे वातावरण से नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करती हैं, जिससे साधक का मन एकाग्र होता है। दीपक जलाकर किया गया जप सीधे इष्ट देव तक पहुँचता है और साधना के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करता है।





