श्रीमद्भागवतकृष्ण के धाम जाने के बाद धर्म का सहारा क्या है?ऋषि यही प्रश्न पूछते हैं कि धर्मरक्षक कृष्ण के धाम जाने पर धर्म ने अब किसकी शरण ली है।#धर्म#कृष्ण#धाम
श्रीमद्भागवतकलियुग के लोगों के लिए सहज कल्याण क्या है?ऋषि सूतजी से यही पूछते हैं कि शास्त्रों का सार बताइए जिससे कलियुग के जीवों का परम कल्याण हो।#कलियुग#सहज कल्याण#शास्त्र सार
श्रीमद्भागवतभागवत सप्ताह क्या है?भागवत सप्ताह सात दिनों में श्रीमद्भागवत श्रवण की वह विधि है जिसे कलियुग के लिये विशेष साधन बताया गया है।#भागवत सप्ताह#सप्ताह श्रवण#कलियुग
श्रीमद्भागवतकलियुग के मुख्य दोष क्या हैं?असत्य, आलस्य, पाखंड, लोभ, सदाचार का अभाव और साधनों का सार घटना कलियुग के दोष बताए गए हैं।#कलियुग#दोष#अधर्म
श्रीमद्भागवतकलियुग में मोक्ष का सबसे आसान उपाय क्या है?कलियुग के लिये श्रीमद्भागवत का श्रवण और केशव-कीर्तन मोक्षदायक साधन बताए गए हैं।#कलियुग#मोक्ष#हरि कीर्तन
भक्ति एवं आध्यात्मनाम संकीर्तन का आध्यात्मिक लाभ क्या हैनाम-संकीर्तन के लाभ — चित्त-शुद्धि, पाप-नाश, भक्ति-उदय और मोक्ष। भागवत 12.3.52 के अनुसार यह कलियुग में सतयुग के तप, त्रेता के यज्ञ और द्वापर की पूजा का फल देता है। देश-काल का कोई बंधन नहीं।#नाम संकीर्तन#आध्यात्मिक लाभ#कलियुग
आध्यात्मिक महत्वतंत्र साधना का आध्यात्मिक महत्व क्या है?तंत्र का आध्यात्मिक महत्व: देह = मंदिर (मोक्ष का साधन)। ब्रह्मांड = शक्ति — उसे जानना = मुक्ति। समावेशी: 'प्रत्येक में शिव।' स्त्री-शक्ति सम्मान। त्वरित मार्ग। कलियुग में क्रिया-प्रधान। कुलार्णव: 'तंत्रं मोक्षस्य साधनम्।'#महत्व#देह-मंदिर#शक्ति