पाशुपतास्त्र शिव का सर्वसंहारक दिव्यास्त्र है जो मन, नेत्र, वाणी या धनुष — किसी से भी चलाया जा सकता है। तीनों लोकों में कोई इससे नहीं बच सकता। कमजोर पर नहीं चलाना — वरना सृष्टि-नाश हो सकता है।
स्रोत प्रश्न: पाशुपतास्त्र क्या होता है →सनातन धर्म के सभी प्रमुख शब्दों के क्या है।
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