विस्तृत उत्तर
ब्रह्मास्त्र के प्रतिकार के विषय में पुराणों और महाभारत में स्पष्ट वर्णन मिलता है।
मुख्य प्रतिकार — ब्रह्मास्त्र का एकमात्र प्रतिकार एक दूसरा ब्रह्मास्त्र है। जब दो ब्रह्मास्त्र आपस में टकराते हैं, तब एक की शक्ति दूसरे को रोकती है। परंतु इसका परिणाम यह होता है कि दोनों की संयुक्त ऊर्जा से प्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है — इसीलिए दो ब्रह्मास्त्रों को आपस में टकराने की अनुमति ऋषि-मुनि नहीं देते थे।
महाभारत का प्रसंग — जब अश्वत्थामा और अर्जुन ने एक साथ ब्रह्मास्त्र चलाए, तब ऋषि व्यास और नारद ने दोनों के बीच आकर इस टकराव को रोका। उन्होंने दोनों से अपने-अपने अस्त्र वापस लेने को कहा। अर्जुन ने अपना ब्रह्मास्त्र वापस ले लिया क्योंकि उन्हें संहार ज्ञान था, परंतु अश्वत्थामा यह नहीं जानता था इसलिए उसने ब्रह्मास्त्र को उत्तरा के गर्भ की ओर मोड़ दिया।
अन्य मत — कुछ ग्रंथों में पाशुपतास्त्र को ब्रह्मास्त्र से भी अधिक शक्तिशाली बताया गया है, इसलिए सैद्धांतिक रूप से पाशुपतास्त्र ब्रह्मास्त्र का प्रतिकार कर सकता है।





