तीन शक्तियां — काशी क्षेत्र (करोड़ों गुना फल), शिवगण-ऊर्जान्वित लिंग, और प्राण-दिशा (वायव्य कोण)। गुप्त नाद-ऊर्जा मंत्रों को बहुगुणित करती है। अष्टमेश-मारकेश दशा के अरिष्ट योग खंडित होते हैं।
स्रोत प्रश्न: शंकुकर्णेश्वर महादेव के सान्निध्य में महामृत्युंजय अनुष्ठान का विशेष महत्व क्या है? →