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नक्षत्र

पुष्य नक्षत्र — नक्षत्र — पूजा, मंत्र, उपाय प्रश्नोत्तर(6)

पुष्य नक्षत्र से जुड़े 6 प्रश्न — विधि, नियम, मंत्र, लाभ। शास्त्र-सम्मत व्याख्या एक स्थान पर।

ज्योतिष ज्ञान

पुष्य नक्षत्र में सोना खरीदना शुभ क्यों?

पुष्य=सबसे शुभ नक्षत्र(गुरु स्वामी)। गुरु=सोना कारक→पुष्य+सोना=दोहरी शुभता। 'पुष्य'=पोषण/वृद्धि। गुरुपुष्यामृत(गुरुवार+पुष्य)=सर्वोत्तम। सर्वार्थ सिद्धि नक्षत्र।

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पंचांग एवं ज्योतिष

पुष्य नक्षत्र क्या होता है?

पुष्य 27 नक्षत्रों में अष्टम, 'नक्षत्रों का राजा'। कर्क 3°20'–16°40'। स्वामी शनि, देवता बृहस्पति। प्रतीक कमल/गाय-थन। गुरु-पुष्य योग सर्वोत्कृष्ट मुहूर्त। जन्म में परोपकारी, धार्मिक, दीर्घायु।

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मुहूर्त

रवि पुष्य नक्षत्र योग में क्या खरीदें

रविवार+पुष्य नक्षत्र = सोना/आभूषण (सबसे प्रचलित), संपत्ति, वाहन, रत्न, व्यापार सामग्री। ~1-2 बार/माह। पुष्य=सबसे शुभ खरीदारी नक्षत्र + रवि=सूर्य तेज।

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मुहूर्त

गुरु पुष्य योग में क्या खरीदना शुभ

गुरुवार+पुष्य = सोना, पीली वस्तुएं, शिक्षा सामग्री, पुखराज, धार्मिक सामग्री, संपत्ति। शिक्षा/धर्म = गुरु पुष्य > रवि पुष्य। बृहस्पति=ज्ञान/धन/धर्म।

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मुहूर्त एवं योग

गुरु पुष्य योग में खरीदारी और पूजा का क्या महत्व है

गुरु पुष्य = गुरुवार + पुष्य नक्षत्र। धन-समृद्धि का सर्वोत्तम मुहूर्त। स्वर्ण/रत्न/सम्पत्ति/वाहन खरीद = अक्षय। बृहस्पति + विष्णु/लक्ष्मी पूजा। पीले वस्त्र-फूल। विवाह वर्जित (पुष्य में), अन्य सभी शुभ। रवि पुष्य से अधिक बार आता है।

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मुहूर्त एवं योग

रवि पुष्य नक्षत्र योग में पूजा का क्या विशेष महत्व है

रवि पुष्य = रविवार + पुष्य नक्षत्र (सर्वश्रेष्ठ)। अत्यन्त दुर्लभ, स्वयंसिद्ध शुभ। पूजा = अनन्त फल। स्वर्ण/रत्न खरीद, व्यापार आरम्भ, मंत्र दीक्षा, गृह प्रवेश। लक्ष्मी-सूर्य पूजा विशेष। वर्ष में कुछ बार ही।

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