शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ गोपीगृहाङ्गणरतये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारयुगल-नाम मन्त्र; ये मन्त्र गोलोक धाम के अधिष्ठाता श्री राधा-कृष्ण के संयुक्त लीला-माधुर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपबाल-गोपाल
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
गोपियों के घरों के आँगन में क्रीड़ा करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
घर-आंगन में खुशियाँ
विस्तृत लाभ
घर-आंगन में खुशियाँ
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ निटिलाक्षाय नमः
ॐ कर्पूरचन्दनोक्षितायै नमः
मृणालवालवल्लरी तरङ्गरङ्गदोर्लते लताग्रलास्यलोलनीललोचनावलोकने। ललल्लुलन्मलन्मनोज्ञमुग्धमोहनाश्रिते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये त्रिलोकात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ वाङ्मय्यै नमः
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं। प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि॥