शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ नागेन्द्राय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपशेष-शायी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो नागों के राजा (शेषनाग) के साथ अभिन्न रूप से जुड़े हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्प-भय का नाश
02
कुंडली में उपस्थित काल-सर्प जैसे घोर ज्योतिषीय दोषों की शांति
विस्तृत लाभ
सर्प-भय का नाश; कुंडली में उपस्थित काल-सर्प जैसे घोर ज्योतिषीय दोषों की शांति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
आवत हियँ हरषीं नहिं नैनन्हि नहिं सनेह। तुलसी तहाँ न जाइये कंचन बरसे मेह॥
रामोऽद्रिकूटेष्वथ विप्रवासे सानुजोऽव्याद् भरताग्रजो माम्
ॐ स्कन्दाय नमः
ॐ भीमाय नमः
ॐ जिह्वां कृष्णप्रिया तथा।
व्यक्ताव्यक्तगिरः सर्वे वेदाद्या व्याहरन्ति याम्। सर्वकामदुघा धेनुः सा मां पातु सरस्वती॥ सौः देवीं वाचमजनयन्त देवास्ता विश्वरूपाः पशवो वदन्ति। सा नो मन्द्रेषमूर्जं दुहाना धेनुर्वागस्मानुपसुष्टुतैतु॥