परशुराम मंत्र
ॐ अध्यात्मयोगकुशलाय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो योग, ध्यान और आत्मविद्या में परम कुशल और निपुण हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
योग सिद्धि
विस्तृत लाभ
योग सिद्धि
जप काल
योग से पूर्व
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
बिभ्राणः शुक बीजपूर कमलं माणिक्यकुम्भं अङ्कुशं पाशं कल्पलतां च खड्ग विलसत् ज्योतिः सुधानिर्झरः । श्यामेनात्त सरोरुहेण सहितो देवीद्वयेनान्तिके गौराङ्गो वरदान हस्त कमलो लक्ष्मीगणेशोऽवतात् ॥
ॐ वसुधारिण्यै नमः
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
अनेकमन्त्रनादमञ्जुनूपुरारवस्खलत्समाजराजहंसवंशणिक्वाणातिगौरवे। विलोलहेमवल्लरीविडम्बिवारुचङ्क्रमे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ महानन्दाय नमः
यदा तमस्तन्न दिवा न रात्रिर्न सन्नचासच्छिव एव केवलः