शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ सर्ववेदादये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपवेद उद्गम
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो समस्त वेदों के आदि स्रोत और ज्ञाता हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
शास्त्र ज्ञान
विस्तृत लाभ
शास्त्र ज्ञान
जप काल
स्वाध्याय पूर्व
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ॐ भिन्नार्गलाय नमः
ॐ कूर्मरूपाय नमः
ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥
ॐ कुन्दकुसुमदन्तायै नमः
पावका नः सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती। यज्ञं वष्टु धियावसुः॥