विस्तृत उत्तर
जनमेजय का सर्पसत्र राजा परीक्षित की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए किया गया भयंकर महायज्ञ था। राजा परीक्षित को तक्षक नाग ने डसा था, जिससे उनकी मृत्यु हुई। इसके प्रतिशोध में परीक्षित के पुत्र राजा जनमेजय ने सर्पसत्र नामक महायज्ञ का आयोजन किया। इस यज्ञ में मंत्रों की शक्ति से पूरे ब्रह्मांड के सर्प खिंच-खिंचकर अग्नि कुंड में गिरने लगे। तक्षक भयभीत होकर इंद्र के सिंहासन से लिपट गया, पर यज्ञ के प्रभाव से इंद्र भी सिंहासन सहित खिंचने लगे। अंततः आस्तीक मुनि ने यज्ञ को रुकवाकर तक्षक के प्राण बचाए।
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