मंत्र विधिमंत्र साधना में गोपनीयता क्यों आवश्यक मानी जाती है?कारण: (1) शक्ति संरक्षण (बीज = अंकुरण तक छुपाएं)। (2) अहंकार बचाव (प्रदर्शन = शत्रु)। (3) दृष्टि दोष। (4) गुरु आज्ञा। अथर्वशीर्ष: 'अशिष्य को न दें, मोह से देना = पाप।' गोपनीय: दीक्षा मंत्र, संख्या, अनुभव। साझा: सार्वजनिक मंत्र (राम, गायत्री)।#गोपनीयता#साधना#मंत्र
मंत्र विधिमंत्र जप बिस्तर पर लेटकर करने से क्या दोष लगता है?बैठकर = सर्वोत्तम (एकाग्रता, ऊर्जा)। लेटकर = कम प्रभावी, महादोष नहीं। अपवाद: रोगी/वृद्ध/गर्भवती = लेटकर मान्य। सोने से पूर्व 'राम' जप = शुभ। जप न छूटे = सबसे महत्वपूर्ण।#बिस्तर#लेटकर#नियम
मंत्र विधिमंत्र जप में दिशा और आसन का चयन कैसे करें?दिशा: पूर्व=सामान्य, उत्तर=ज्ञान/मोक्ष, दक्षिण=पितृ। आसन: कुश=सर्वोत्तम (गीता 6.11), ऊनी कंबल, रेशम। खुली भूमि=वर्जित (ब्रह्माण्ड पुराण)। रंग: पीला=ज्ञान, लाल=शक्ति, काला=तांत्रिक, श्वेत=शांति।#दिशा#आसन#चयन
मंत्र विधिमंत्र जप के दौरान कोई बोलने लगे तो क्या करना चाहिए?सामान्यतः बीच में बोलना अनुशंसित नहीं। अत्यावश्यक: रोकें → बात → पुनः जप। अनावश्यक: संकेत दें, बाद में। अनुष्ठान: मौन अनिवार्य। दैनिक: अत्यधिक कठोरता न रखें। निश्चित समय/स्थान = बाधा न्यूनतम। नियमितता > कठोरता।#बाधा#बोलना#नियम
मंत्र विधिमंत्र जप यात्रा के दौरान कर सकते हैं या नहीं?हां, पूर्णतः मान्य। नारद: सदा, सर्वत्र। मानसिक जप सर्वोत्तम। छोटी माला (27 मनके) जेब में। उंगलियों पर गिनती। शौचालय में वाचिक नहीं (मानसिक चले)। यात्रा = जप छोड़ने का कारण नहीं।#यात्रा#जप#चलते हुए