श्राद्ध एवं पितृ कर्मश्राद्ध कर्म कौन कौन से दिन करने चाहिएपुण्यतिथि (वार्षिक), पितृपक्ष (भाद्रपद 15 दिन), मासिक (प्रथम वर्ष), अमावस्या (हर माह), सोमवती अमावस्या, ग्रहण, मकर संक्रांति, तीर्थ पर। कुतप काल (दोपहर) सर्वोत्तम।#श्राद्ध#दिन#तिथि
श्राद्ध एवं पितृ कर्ममासिक श्राद्ध कैसे करें हर महीनेहर माह मृत्यु तिथि पर: तिल-जल तर्पण + ब्राह्मण/गरीब भोज + कौवा/कुत्ता/गाय भोजन + दान। 12 माह तक। न्यूनतम: तर्पण + गरीब भोज। 12 माह बाद → वार्षिक श्राद्ध।#मासिक श्राद्ध#हर महीने#तिथि
श्राद्ध एवं पितृ कर्महरिद्वार में अस्थि विसर्जन कैसे करेंहर की पैड़ी/गंगा घाट → पंडा से संपर्क → गंगा स्नान → मंत्रोच्चार → तिल-जल तर्पण → अस्थि गंगा में → पिंडदान → दान। पंडा कुल रजिस्टर रखता है। विश्वसनीय पंडा चुनें; पर्यावरण अनुकूल विसर्जन।#हरिद्वार#अस्थि विसर्जन#गंगा
श्राद्ध एवं पितृ कर्मअस्थि विसर्जन कब और कैसे चुनें3रा दिन = सर्वोत्तम संग्रह। 10 दिन में विसर्जन। नए पात्र में दूध/गंगाजल+तुलसी। गंगा/पवित्र नदी में विसर्जन। विस्तार: प्रश्न 519।#अस्थि#विसर्जन#समय
श्राद्ध एवं पितृ कर्मश्राद्ध करने का समय दोपहर में या शाम कोकुतप काल (दोपहर ~11:36-12:24) = सर्वोत्तम। अपराह्ण (दोपहर-सूर्यास्त) = स्वीकार्य। प्रातः/रात = वर्जित। पितरों का समय = दोपहर/अपराह्ण। व्यावहारिक: 11-2 बजे।#श्राद्ध#समय#दोपहर