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विस्तृत उत्तर
मृतक के लिए अत्यधिक रोना शास्त्रों में मना किया गया है। गरुड़ पुराण में चेतावनी दी गई है कि मृत्यु के बाद परिजनों को क्रंदन या विलाप नहीं करना चाहिए। यदि वे रोते हैं और रोते समय उनके मुख या नासिका से श्लेष्मा या अश्रु भूमि पर गिरते हैं, तो भूख-प्यास से व्याकुल प्रेत को विवश होकर उसी कफ और अश्रु का भक्षण करना पड़ता है। इसलिए मृत्यु के बाद अत्यधिक विलाप प्रेत के लिए कष्टकारक माना गया है।
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