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विस्तृत उत्तर
नानाक्रन्दपुर यममार्ग की 16 मध्यवर्ती पुरियों में ग्यारहवाँ नगर है। यह इसलिए भयानक है क्योंकि यहाँ चारों ओर से क्रंदन, रोने और चीखने की भयानक ध्वनियाँ आती हैं। आत्मा दुःखदपुर के बाद इस नगर में पहुँचती है। यममार्ग में भय, पीड़ा और यमदूतों का तर्जन पहले से ही आत्मा को कष्ट देता है, और नानाक्रन्दपुर में चारों ओर की चीख-पुकार उस भय को और बढ़ाती है।
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