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विस्तृत उत्तर
पयोवर्षणपुर यममार्ग की 16 मध्यवर्ती पुरियों में चौदहवाँ नगर है। यहाँ निरंतर तप्त जल या अन्य पीड़ादायक द्रव्यों की वर्षा होती है। आत्मा रौद्रपुर के बाद इस नगर में पहुँचती है। यममार्ग में दाह, पीड़ा, भय और थकान से पीड़ित आत्मा के लिए पयोवर्षणपुर एक और कष्टदायक पड़ाव है।
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