विस्तृत उत्तर
भगवान शिव को पाँच पत्र (पत्ते) अत्यंत प्रिय हैं। इन्हें 'शिव पंचपत्र' कहा जाता है:
1. बिल्वपत्र (बेलपत्र): सर्वश्रेष्ठ। शिव को सबसे प्रिय। त्रिदल = त्रिनेत्र/त्रिशूल। बेलपत्र बिना शिव पूजा अधूरी। 'एकबिल्वं शिवार्पणम्।'
2. आक (मदार) के पत्ते: श्वेत आक (मदार) के पुष्प और पत्ते शिव को प्रिय। आक = विष से भरा पौधा — शिव विषधर हैं, विष भी उन्हें प्रिय।
3. धतूरे के पत्ते: धतूरा शिव का अत्यंत प्रिय पौधा। धतूरे के फल, पुष्प और पत्ते तीनों शिवलिंग पर चढ़ाए जाते हैं। मान्यता है कि समुद्र मंथन से धतूरा उत्पन्न हुआ।
4. तुलसी पत्र: यद्यपि तुलसी मुख्यतः विष्णु को अर्पित की जाती है, किन्तु कुछ परम्पराओं में शिव को तुलसी अर्पित करने का विधान है (विशेषतः शालिग्राम शिवलिंग पर)। ध्यान दें: अधिकांश शास्त्रों में शिवलिंग पर तुलसी चढ़ाना वर्जित माना गया है (शंखचूड़ कथा के कारण)। यह क्षेत्रीय परम्परा पर निर्भर करता है।
5. शमी के पत्ते: शमी वृक्ष शिव को प्रिय है। विजयादशमी पर शमी पूजा शिव सम्बन्धित है। शमी = तप और संयम का प्रतीक = शिव के गुण।
अन्य प्रिय पत्र/पुष्प: कुश (दर्भ), दूर्वा (विशेष अवसरों पर), श्वेत कमल, अपामार्ग (चिरचिटा)।
विशेष: शिव पूजा में सभी पत्रों में बिल्वपत्र सर्वोपरि है। 'एक बिल्वं शिवार्पणम्' — एक बेलपत्र = सम्पूर्ण पूजा। यदि कोई अन्य सामग्री उपलब्ध न हो, केवल बेलपत्र और जल से शिव पूजा पूर्ण होती है।





