विस्तृत उत्तर
सुतल लोक में दिव्य औषधियाँ निवासियों को असीम स्वास्थ्य, ऊर्जा और चिर-यौवन प्रदान करती हैं। यहाँ के निवासी पारलौकिक जड़ी-बूटियों से निर्मित विशेष रसों और रसायनों का भोजन, पेय और स्नान में उपयोग करते हैं। इन दिव्य रसायनों के निरंतर सेवन और संपर्क से उन्हें मानसिक क्लेश, तनाव, चिंता और शारीरिक रोग नहीं सताते। उन्हें बालों का सफेद होना, झुर्रियाँ, शारीरिक अक्षमता और बुढ़ापा अनुभव नहीं होता। उनकी शारीरिक कांति फीकी नहीं पड़ती, पसीने में दुर्गंध नहीं होती, और वे निरंतर कार्य या भोग करने पर भी थकान या ऊर्जा की कमी महसूस नहीं करते।
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