विस्तृत उत्तर
सुतल लोक में रोग दिव्य औषधियों और रसायनों के प्रभाव से नहीं होते। शुकदेव गोस्वामी महाराज परीक्षित को बताते हैं कि सुतल लोक के निवासी अद्भुत और पारलौकिक जड़ी-बूटियों से बने विशेष रसों और रसायनों का अपने भोजन, पेय और स्नान में उपयोग करते हैं। इन दिव्य रसायनों के निरंतर सेवन और संपर्क के प्रभाव से सुतल लोक के निवासियों को कभी भी आधि, यानी मानसिक क्लेश, तनाव या चिंता, और व्याधि, यानी शारीरिक रोग, नहीं सताती। उनका जीवन उत्साह, ऊर्जा और सर्वोच्च स्वास्थ्य से परिपूर्ण रहता है।
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