विस्तृत उत्तर
ब्रह्मांड की ऊर्ध्वाधर संरचना में स्वर्लोक भौतिक जगत और विशुद्ध आध्यात्मिक जगत के ठीक मध्य में स्थित एक विशाल संक्रमण क्षेत्र है। नीचे की ओर स्वर्लोक भुवर्लोक (अंतरिक्ष) की ऊपरी सीमा से लगा हुआ है। भुवर्लोक का विस्तार वहीं तक है जहाँ तक वायु का प्रवाह होता है और बादल तैरते हैं। ऊपर की ओर स्वर्लोक महर्लोक की निचली सीमा से लगा हुआ है। ब्रह्मांड पुराण में वर्णित चौदह भुवनों के पदानुक्रम में स्वर्लोक न केवल पृथ्वी से ऊपर स्थित है बल्कि यह उच्चतर लोकों (महर्लोक, जनलोक, तपलोक, सत्यलोक) की ओर जाने वाले आध्यात्मिक मार्ग का पहला और सबसे महत्वपूर्ण सोपान भी है जो भौतिक सृष्टि और विशुद्ध आध्यात्मिक सृष्टि के मध्य एक सेतु का कार्य करता है।
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