विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कंध के तेईसवें अध्याय में शिशुमार चक्र के वर्णन में सप्तर्षि मंडल का स्थान स्पष्ट किया गया है। शिशुमार चक्र के वर्णन के अनुसार इसके कूल्हे (Hip) पर सप्तर्षि मंडल स्थित है। सप्तर्षि मंडल ध्रुवलोक से 13 लाख योजन नीचे है। ध्रुवलोक जो स्वर्लोक की सर्वोच्च सीमा है उससे 13 लाख योजन नीचे सप्तर्षि मंडल स्थित है। सप्तर्षि मंडल में सात महान ऋषियों — भृगु, मरीचि, अत्रि, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु और वशिष्ठ — का निवास माना जाता है। इन सात ऋषियों के नाम पर ही इस तारा-मंडल का नामकरण हुआ है। यह तारा-मंडल रात्रि के आकाश में सप्त तारों के समूह के रूप में दिखाई देता है।
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