विस्तृत उत्तर
दीक्षा = 'द्वितीय जन्म' — दीक्षा पश्चात साधक नया व्यक्ति:
बदलाव
- 1आध्यात्मिक: मंत्र शक्ति जागृत, इष्ट से जुड़ाव, ध्यान गहरा, अंतर्ज्ञान बढ़ना।
- 2मानसिक: शांति, एकाग्रता, भय कम, आत्मविश्वास, स्पष्ट सोच।
- 3शारीरिक: ऊर्जा वृद्धि, स्वास्थ्य सुधार (कुछ साधकों में)।
- 4व्यवहारिक: सात्विक आहार-विहार, अनुशासन, सत्यवादिता — स्वाभाविक।
- 5कर्म शुद्धि: संचित कर्म क्रमशः कम — दीक्षा = कर्म दहन प्रक्रिया आरंभ।
- 6गुरु संबंध: गुरु-शिष्य = आजीवन — सबसे पवित्र संबंध।
सावधानी
- ▸बदलाव = क्रमिक, रातोंरात नहीं।
- ▸कुछ प्रारंभिक 'शोधन' (detox) अनुभव — पुराने कर्म सतह पर आना।
- ▸धैर्य + नियमित साधना = बदलाव स्थायी।


