विस्तृत उत्तर
स्कंद पुराण (प्रभास खण्ड, अध्याय ३३) और पद्म पुराण (सृष्टि खण्ड) में देवी सरस्वती के रक्षक स्वरूप का अत्यंत रोमांचक आख्यान मिलता है।
प्राचीन काल में भृगुवंशियों (ब्राह्मणों) और हैहय वंशियों (क्षत्रियों) के बीच भयंकर और विनाशकारी युद्ध हुआ। इस क्रूर संघर्ष और महर्षि और्व (या दधीचि के पुत्र) के प्रचंड क्रोध से एक सर्वनाशी अग्नि उत्पन्न हुई, जिसे 'बड़वाग्नि' या 'वाडवाग्नि' (Vadavagni) कहा गया।
यह अग्नि एक घोड़े के मुख के समान थी और इतनी तीव्र थी कि यह संपूर्ण ब्रह्मांड और देवताओं को भस्म करने की क्षमता रखती थी।
यह अग्नि आज भी समुद्र में अत्यंत छोटे रूप में विद्यमान है, जो भविष्य में कल्कि अवतार के अश्व के रूप में प्रकट होगी।





