विस्तृत उत्तर
महाभारत के अरण्य पर्व में वर्णित यक्ष-युधिष्ठिर संवाद यक्षों की उच्च बौद्धिक क्षमता, मायावी शक्ति और धर्म संबंधी ज्ञान का प्रामाणिक उदाहरण है। जब पांडव वनवास में थे, तब एक सरोवर के रक्षक यक्ष ने जल पीने का प्रयास कर रहे चारों पांडवों—भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव—को अपने प्रश्नों का उत्तर न देने पर मूर्छित, मृत-तुल्य, कर दिया। जब युधिष्ठिर वहाँ पहुँचे, तो यक्ष ने उनसे धर्म, दर्शन और जीवन-मरण से संबंधित अत्यंत गूढ़ प्रश्न पूछे। युधिष्ठिर के धर्मसम्मत उत्तरों से संतुष्ट होकर यक्ष ने उनके भाइयों को जीवित कर दिया। यह यक्ष वस्तुतः धर्मराज ही थे, पर यह प्रसंग दिखाता है कि यक्ष योनि में ज्ञान और धर्म-परीक्षण की क्षमता होती है।
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