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ज्योतिष दर्शन — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 5 प्रश्न

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ज्योतिष दर्शन

ग्रह दोष और पितृ दोष में क्या संबंध?

पितृ दोष=विशेष ग्रह दोष। सूर्य/चंद्र/9वें पर राहु-केतु-शनि=संकेत। पूर्वजों अतृप्ति=कुंडली ग्रह दोष। उपाय: श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, कौवा/गाय रोटी। पितर तृप्ति=ग्रह दोष कम।

ग्रह दोषपितृ दोषसंबंध
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ग्रह दोष पूर्व जन्म के कर्मों का फल है क्या?

हाँ — कुंडली=प्रारब्ध कर्म(पूर्व जन्म)। 3 कर्म: संचित/प्रारब्ध(कुंडली)/क्रियमाण(वर्तमान)। वर्तमान कर्म=प्रारब्ध बदल सकता। 'अपना उद्धार स्वयं करो'(गीता)। कुंडली=संकेत, निर्णय नहीं।

ग्रह दोषपूर्व जन्मकर्म
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ज्योतिष में उपचार और पूजा में कौन अधिक प्रभावी?

पूजा(भक्ति)>उपचार(ज्योतिष)। गीता: ईश्वर शरण=सर्वपापमुक्ति=ग्रह से परे। पर दोनों पूरक। भक्ति+कर्म+उपचार=पूर्ण। सच्ची भक्ति=सर्वोपरि।

उपचारपूजाप्रभावी
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दान से ग्रह कैसे शांत होते हैं?

दान=शुभ कर्म→अशुभ संतुलित→ग्रह शांत। ग्रह-विशिष्ट दान=ऊर्जा संतुलित(शनि=लोहा, गुरु=पुस्तक)। अहंकार त्याग+आशीर्वाद। सच्चे हृदय से — दिखावा=निष्फल।

दानग्रह शांतिकर्म
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ग्रह दोष और कर्म दोष में क्या संबंध?

ग्रह दोष=कर्म दोष का प्रतिबिंब। कुंडली=कर्मों का नक्शा। ग्रह=डाकिया, कर्म=पत्र — ग्रह कर्मफल पहुँचाते। मंत्र/दान=तीव्रता कम। मूल समाधान=कर्म सुधार। अच्छे कर्म=शुभ ग्रह।

ग्रह दोषकर्मसंबंध

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।