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पर्व — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 29 प्रश्न

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पर्व

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में औषधीय गुण होते हैं क्या

हाँ (मान्यता + कुछ शोध)। गीता 15.13: चन्द्रमा औषधि पोषक। 16 कलाओं से पूर्ण। BHU: लैक्टिक अम्ल+स्टार्च चन्द्रकिरण अवशोषित। आयुर्वेद: शरद पित्त+चन्द्र शीतल=पित्तशामक। काशी: अस्थमा औषधि। बड़े clinical trials नहीं, खीर=पौष्टिक+शीतल।

शरद पूर्णिमाचन्द्र किरणेंऔषधि
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नाग पंचमी पर बामी की पूजा क्यों करते हैं

बामी पूजा: (1) बामी=नागों का निवास — घर जाकर पूजा। (2) पाताल मार्ग। (3) शिव-नाग सम्बन्ध (श्रावण)। (4) कृषि रक्षा — नाग=फसल मित्र। दूध+हल्दी+कुमकुम बामी पर। सर्प को जबरन दूध वर्जित — हानिकारक।

नाग पंचमीबामीसर्प
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महालया में पितरों का पृथ्वी पर आगमन होता है क्या शास्त्रीय प्रमाण

महालया पितर आगमन: हाँ (शास्त्रीय)। गरुडपुराण: यमराज पितरों को मुक्त → 15 दिन पृथ्वी निकट। मार्कण्डेय: पितरों को 'छुट्टी'। विष्णुपुराण: श्राद्ध न करें तो शाप। महाभारत: भीष्म द्वारा विधान। वैज्ञानिक प्रमाण नहीं — श्रद्धा प्रधान।

महालयापितृपक्षपितर
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गुरु पूर्णिमा पर गुरु दक्षिणा में क्या देनी चाहिए

गुरु दक्षिणा: यथाशक्ति धन (₹101/501/1001), वस्त्र, फल-मिठाई, पुस्तकें, गौदान, स्वर्ण। सर्वोत्तम = गुरु सेवा + आज्ञा पालन + शिक्षा अभ्यास। 'विना दक्षिणा विद्या निष्फल'। राशि गौण, कृतज्ञता प्रधान।

गुरु पूर्णिमादक्षिणागुरु
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गंगा दशहरा पर गंगा स्नान करने से कितने पापों का नाश होता है

गंगा दशहरा = 10 पापों का नाश। 3 कायिक (हिंसा/चोरी/परस्त्री) + 4 वाचिक (कठोर/असत्य/निन्दा/बकवास) + 3 मानसिक (लालसा/द्वेष/मिथ्या)। ब्रह्मपुराण: 'हरते दशपापानि तस्माद् दशहरा'। 10 योगों में गंगा अवतरित। 10 डुबकी + 10 दान।

गंगा दशहरास्नानदस पाप
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नवरात्रि के दसवें दिन विजयादशमी मनाने का क्या कारण है

विजयदशमी (10वाँ): दुर्गा ने 9 दिन युद्ध → 10वें महिषासुर वध। राम ने 9 दिन शक्ति पूजा → 10वें रावण वध। 9=साधना/शक्ति, 10=विजय/फल। अबूझ मुहूर्त, शस्त्र पूजा, नया कार्य।

विजयदशमीनवरात्रिदशहरा
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भैया दूज पर बहन तिलक कैसे लगाए

भैया दूज तिलक: बहन स्नान → चौकी पर लाल कपड़ा → भाई बिठाएँ → अनामिका से रोली तिलक (भ्रूमध्य) + अक्षत → आरती → मिठाई → दक्षिणा। कथा: यमुना ने यमराज को तिलक → अकाल मृत्यु भय नाश।

भैया दूजतिलकबहन
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अन्नकूट उत्सव में गोवर्धन पर्वत बनाने की विधि क्या है

गोवर्धन विधि: गाय गोबर से लेटे पुरुष (गिरिराज) बनाएँ → नाभि पर कटोरा (दूध/दही) → फूल-तुलसी सजाएँ → पूजा → 56 भोग (छप्पन) अर्पण → 7 परिक्रमा → गाय पूजा। भागवत: कृष्ण ने इन्द्र के बजाय गोवर्धन पूजा कराई।

अन्नकूटगोवर्धनगोबर
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दशहरा पर शमी वृक्ष की पूजा का पौराणिक कारण क्या है

शमी पूजा कारण: महाभारत — पाण्डवों ने शमी पर शस्त्र छिपाए, विजयदशमी को उतारे → विजय। 'शमी शमयते पापम्' = पापनाशक। शमी पत्ते='सोना' भेंट। अग्नि निवास (अरणि)। शनि वृक्ष। महाराष्ट्र/दक्षिण में अत्यन्त प्रचलित।

दशहराशमीपाण्डव
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अक्षय तृतीया शुभ कार्यों के लिए सबसे उत्तम क्यों माना जाता है

अक्षय तृतीया सर्वोत्तम क्यों: (1) स्वयंसिद्ध — मुहूर्त अनावश्यक। (2) साढ़े तीन अबूझ मुहूर्तों में। (3) सूर्य-चन्द्र दोनों उच्च राशि में। (4) त्रेतायुग आरम्भ, परशुराम जन्म, सुदामा-कृष्ण भेंट। (5) 'अक्षय' = कभी क्षीण न हो — दान/कर्म = अनन्त फल।

अक्षय तृतीयास्वयंसिद्धशुभ
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देव दीपावली पर काशी में दीपदान का क्या विधान है

काशी देव दीपावली: कार्तिक पूर्णिमा। प्रातः गंगा स्नान → शिव पूजा (त्रिपुरारि) → सन्ध्या में 84 घाटों पर लाखों दीये → दशाश्वमेध घाट महा गंगा आरती → गंगा में दीये प्रवाहित → रात्रि जागरण। स्कन्द पुराण: दीपदान = सर्वपापनाश। शिव का त्रिपुरासुर वध उपलक्ष्य।

देव दीपावलीकाशीदीपदान
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शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की किरणों का क्या विशेष प्रभाव है

शरद पूर्णिमा चन्द्र प्रभाव: (1) 16 कलाओं से पूर्ण — अन्य पूर्णिमाओं में नहीं। (2) गीता 15.13: 'सोमो भूत्वा रसात्मकः' — अमृत वर्षा। (3) आयुर्वेद: पित्त शमन, औषधि निर्माण। (4) BHU शोध: लैक्टिक अम्ल + स्टार्च चन्द्रकिरणें अवशोषित करते हैं। (5) पेरिजी + स्वच्छ वातावरण = तीव्र किरणें। अस्थमा, नेत्र, चर्म लाभ।

शरद पूर्णिमाचन्द्रमाअमृत वर्षा
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गुरु पूर्णिमा पर व्यास पूजा का क्या विधान है

व्यास पूजा: आषाढ़ पूर्णिमा। व्यास पीठ → चित्र/पादुका स्थापित → गणपति पूजन → व्यास पूजन → गुरु परम्परा (ब्रह्मा से गुरु तक) → 'गुरुर्ब्रह्मा...' मंत्र → गुरु गीता पाठ → दक्षिणा। व्यास = वेद विभाजक, आदि गुरु। चातुर्मास साधना आरम्भ।

गुरु पूर्णिमाव्यास पूजावेदव्यास
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दुर्गा पूजा में विजयादशमी पर अपराजिता पूजा क्या है

अपराजिता पूजा: विजयदशमी अपराह्न में। अपराजिता = अपराजित देवी (दुर्गा रूप)। ईशान कोण में अष्टदल कमल → अपराजिता पुष्प (नीले) + शमी पत्र → 'ॐ अपराजितायै नमः'। राम ने लंका विजय पूर्व की। बंगाल: दुर्गा विसर्जन से पूर्व। विजय और सफलता हेतु।

विजयदशमीअपराजितादुर्गा
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उगादी या गुड़ी पड़वा पर पूजा कैसे करें

गुड़ी पड़वा/उगादी: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा = हिन्दू नववर्ष। गुड़ी पड़वा: गुड़ी स्थापना (बाँस + कलश + साड़ी + नीम) + नीम-गुड़ खाना। उगादी: षड्रस पच्चड़ी (6 स्वाद)। ब्रह्मा पूजन, पंचांग श्रवण। सृष्टि रचना + राम राज्याभिषेक + विक्रम संवत्।

उगादीगुड़ी पड़वाहिन्दू नववर्ष
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मकर संक्रांति पर स्नान का क्या विशेष महत्व है

मकर संक्रान्ति स्नान: उत्तरायण आरम्भ (भीष्म — उत्तरायण = मोक्ष)। गंगासागर स्नान सर्वोत्तम — 'गंगासागर एक बार'। पुण्यकाल = अक्षय फल। 7 जन्म पापनाश। तिल-जल स्नान → सूर्य अर्घ्य → तिल-गुड़ दान → खिचड़ी।

मकर संक्रान्तिस्नानसूर्य
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तुलसी विवाह प्रबोधिनी एकादशी पर कैसे करें

तुलसी विवाह: देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल)। तुलसी = कन्या (साड़ी, श्रृंगार), शालग्राम = वर। विवाह: गणपति पूजन → कन्यादान → गठबन्धन → 7 फेरे (दीपक चारों ओर) → आरती। गन्ना-आँवला अर्पित। इससे विवाह मौसम आरम्भ। कन्यादान पुण्य।

तुलसी विवाहप्रबोधिनी एकादशीशालग्राम
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शरद पूर्णिमा पर खीर रखने की परंपरा का क्या कारण है

शरद पूर्णिमा खीर: (1) चन्द्रमा सोलह कलाओं में पूर्ण — अमृत वर्षा। (2) आयुर्वेद: शरद में पित्त बढ़ता है, चन्द्र किरण + खीर = शीतल, पित्तशामक। (3) भागवत: कृष्ण रासलीला रात्रि। (4) कोजागरी: लक्ष्मी जागने वालों को धन देती हैं। चाँदनी में रखकर प्रातः प्रसाद।

शरद पूर्णिमाखीरचन्द्रमा
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नवरात्रि में ज्वारा बोने की विधि क्या है

नवरात्रि ज्वारा: प्रतिपदा को घटस्थापना के साथ — मिट्टी के पात्र में शुद्ध मिट्टी + जौ/गेहूँ बीज → जल छिड़कें → 9 दिन अँधेरे में (सुबह-शाम जल) → 5-7 इंच अंकुर → नवमी/दशमी को निकालें → प्रसाद (कान पर लगाएँ) + विसर्जन। ज्वारा = शक्ति जागृति, सौभाग्य प्रतीक।

नवरात्रिज्वाराघटस्थापना
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गोवर्धन पूजा कैसे करें

गोवर्धन पूजा: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा। गोबर से गोवर्धन आकृति → पूजा → अन्नकूट (छप्पन भोग) अर्पण → परिक्रमा → गाय पूजा। भागवत: कृष्ण ने गोवर्धन उठाकर ब्रज रक्षा की। भावना: प्रकृति कृतज्ञता, गौ सेवा।

गोवर्धनअन्नकूटकृष्ण
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भैया दूज पर पूजा कैसे करें

भैया दूज: कार्तिक शुक्ल द्वितीया। बहन भाई को तिलक (रोली-चावल) → आरती → मिठाई/फल → भोजन खिलाए। भाई उपहार दे। कथा: यमुना ने यमराज का तिलक किया — वरदान: तिलक करवाने वाले को यमभय नहीं। भाई-बहन स्नेह बन्धन।

भैया दूजयम द्वितीयाभाई-बहन
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अन्नकूट पूजा की विधि क्या है

अन्नकूट: 56 (छप्पन) प्रकार के व्यंजन = अन्न का पर्वत। कृष्ण/गोवर्धन को अर्पित → भोग → प्रसाद वितरण। 56 = 7 दिन × 8 प्रहर (गोवर्धन उठाने की अवधि)। श्रीनाथजी, जगन्नाथ, वृन्दावन मन्दिरों में भव्य। यथाशक्ति व्यंजन बनाएँ।

अन्नकूटछप्पन भोगगोवर्धन
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दशहरा पर रावण दहन का आध्यात्मिक अर्थ क्या है

रावण दहन = अपने भीतर की 10 बुराइयों (काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मात्सर्य आदि) का दहन। अध्यात्म: राम = आत्मा, रावण = अहंकार, सीता = बुद्धि — अहंकार पर आत्मा की विजय। 9 दिन शक्ति साधना → 10वें दिन विजय। बाहरी दहन प्रतीकात्मक — वास्तविक विजय आन्तरिक।

दशहरारावण दहनविजयदशमी
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देव दीपावली कब मनाते हैं और कैसे

देव दीपावली: कार्तिक पूर्णिमा — देवताओं की दीपावली। शिव का त्रिपुरासुर वध। गंगा स्नान → शिव-विष्णु पूजा → सन्ध्या में लाखों दीये (नदी तट, घाट, मन्दिर)। काशी में 84 घाटों पर दीपदान + भव्य गंगा आरती। सर्वपापनाश, मोक्ष।

देव दीपावलीकार्तिक पूर्णिमाकाशी

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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