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दशमहाविद्या — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 9 प्रश्न

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दशमहाविद्या

षोडशी त्रिपुर सुंदरी की साधना विधि क्या है?

ललिता/राजराजेश्वरी। 16 कलाएं। गुरु दीक्षा अनिवार्य। श्री चक्र + 'ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः'। पंचदशाक्षरी (15 अक्षर) = गुरु से। ललिता सहस्रनाम। धन+मोक्ष दोनों।

षोडशीत्रिपुर सुंदरीललिता
दशमहाविद्या

दस महाविद्या साधना बिना गुरु दीक्षा के कर सकते हैं या नहीं?

गहन तांत्रिक = गुरु अनिवार्य। स्तोत्र/सामान्य पूजा = बिना दीक्षा संभव। उग्र (काली/बगलामुखी/छिन्नमस्ता) = खतरनाक बिना गुरु। सौम्य (भुवनेश्वरी/कमला) = सरल। शुरुआत: सौम्य → उग्र।

गुरु दीक्षासाधनानियम
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बगलामुखी माता की पूजा शत्रु बाधा में कैसे सहायक है?

स्तंभन शक्ति — शत्रु वाक्/बुद्धि/गति रोकना। कोर्ट केस विजय, षड्यंत्र विफल। 'ॐ ह्लीं बगलामुखी...' मंत्र। पीला रंग प्रधान। महाभारत: कृष्ण-अर्जुन ने पूजा की (अमर उजाला)।

बगलामुखीशत्रुबाधा
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मातंगी देवी की साधना से वाक् सिद्धि कैसे प्राप्त होती है?

नवमी महाविद्या — वाक्/कला देवी। बीज: 'ॐ ह्रीं ऐं भगवती मतंगेश्वरी श्रीं स्वाहा'। वाक् सिद्धि = सम्मोहक वाणी। कवि/वक्ता/गायक/कलाकार। गृहस्थ सुख सर्वोत्तम (Mahakavya)। हरा रंग।

मातंगीवाक् सिद्धिसाधना
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बगलामुखी मंत्र का जप कैसे करें और कितनी बार?

'ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ॐ नमः'। 108 दैनिक, सवा लाख अनुष्ठान। हल्दी माला। पीला: आसन/वस्त्र/फूल। मंगलवार/शनिवार। गुरु दीक्षा अनुशंसित। शुद्ध उच्चारण अनिवार्य।

बगलामुखीमंत्रजप
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भुवनेश्वरी देवी की पूजा से क्या सिद्धि प्राप्त होती है?

तीनों लोकों की ईश्वरी। सिद्धि: संतान सुख (विशेष), अभय, सर्वसिद्धि, सूर्य तेज, मान-सम्मान। बीज: 'ह्रीं भुवनेश्वरीयै ह्रीं नमः'। सौम्य — सामान्य भक्तों को भी उपयुक्त।

भुवनेश्वरीसिद्धिपूजा
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दस महाविद्याओं के नाम और उनकी साधना का क्रम क्या है?

10 नाम: काली→तारा→षोडशी→भुवनेश्वरी→छिन्नमस्ता→भैरवी→धूमावती→बगलामुखी→मातंगी→कमला। काली कुल: काली/तारा/भुवनेश्वरी/छिन्नमस्ता। श्री कुल: शेष 6। उग्र/सौम्य/सौम्य-उग्र 3 श्रेणी (Webdunia)।

दस महाविद्यानामक्रम
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बगलामुखी मंत्र के नुकसान क्या हो सकते हैं गलत जप से?

गलत जप = मानसिक अशांति, क्रोध, अनिद्रा, कार्य बाधा, स्वयं पर स्तंभन। कारण: अशुद्ध उच्चारण, बिना गुरु, अशुद्ध मन, हानि नीयत। बचाव: गुरु दीक्षा, सात्विक उद्देश्य, शुद्धता। क्षमा + गुरु परामर्श।

बगलामुखीनुकसानगलत
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तारा महाविद्या की साधना कैसे करें और इसके क्या लाभ हैं?

दूसरी महाविद्या — 'तारने वाली'। नीलवर्णा, वशिष्ठ प्रथम उपासक। बीज: 'ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट'। रात्रि साधना, नीला आसन/वस्त्र। लाभ: वाक् सिद्धि, आर्थिक+मोक्ष, ज्ञान। गुरु आवश्यक।

तारासाधनाविधि

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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