ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

अनन्य भक्ति — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 1 प्रश्न

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गीता ज्ञान

गीता श्लोक 9.22 — अनन्याश्चिन्तयन्तो मां — अर्थ क्या?

गीता 9.22: 'जो अनन्य भाव से मेरा निरंतर चिंतन करते हैं, उनका योगक्षेम मैं स्वयं वहन करता हूँ।' योग = अप्राप्त की प्राप्ति, क्षेम = प्राप्त की रक्षा। 'वहामि अहम्' = मैं स्वयं करता हूँ। शर्त: अनन्य भक्ति।

गीता 9.22अनन्य भक्तियोगक्षेम

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।