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त्रिसंध्या — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 2 प्रश्न

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मंत्र विधि

संध्या काल में मंत्र जप करने का क्या महत्व है?

संध्या = दो ऊर्जाओं का मिलन — मंत्र शक्ति अधिक। 'संध्याहीनोऽशुचिः' — संध्या बिना अशुद्ध। प्रातः (ब्रह्म मुहूर्त) = सर्वोत्तम। मध्याह्न = मध्यम। सायं = द्वितीय। कम से कम प्रातः संध्या = अनिवार्य। गायत्री = सूर्य मंत्र = संध्या हेतु।

संध्यासमयत्रिसंध्या
जप समय

मंत्र जप का सही समय क्या है?

मंत्र जप का सर्वोत्तम समय ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-5:36 बजे) है — जप का फल 1000 गुना अधिक। प्रातः संध्या और सायंकाल संध्या भी शुभ हैं। प्रत्येक वार का अपना विशेष देवता है। नित्य एक ही समय जप करें — यह नियमितता जप की शक्ति बढ़ाती है।

जप समयब्रह्ममुहूर्तसंध्या

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।