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केतु कैसे सम्बन्धित प्रश्न(9)

केतु कैसे पर शास्त्रीय व्याख्या और उत्तर — कुल 9 सम्बन्धित प्रश्न उपलब्ध हैं।

केतु कैसे (9)
केतु कैसे पर पूछे गए प्रश्न
  1. लहसुनिया रत्न केतु शांति में कैसे सहायक?
  2. केतु मंत्र का जप केतु दोष शांति के लिए कैसे करें?
  3. राहु केतु कैसे बने?
  4. राहु और केतु अमर कैसे हो गए?
  5. राहु और केतु की उत्पत्ति कैसे हुई?
रत्न शास्त्र

लहसुनिया रत्न केतु शांति में कैसे सहायक?

लहसुनिया=केतु। रोग मुक्ति, दुर्घटना रक्षा, धनलाभ। अनामिका, चांदी, शनिवार, 'ॐ कें केतवे नमः'। ~1 माह। ज्योतिषी सलाह।

#लहसुनिया#केतु
ज्योतिष

केतु मंत्र का जप केतु दोष शांति के लिए कैसे करें?

बीज: 'ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः' 17,000। सरल: 'ॐ कें केतवे नमः' 108। मंगलवार/शनिवार, भूरे वस्त्र, 7 मुखी रुद्राक्ष। गणेश पूजा। केतु = मोक्षकारक भी। ज्योतिषी परामर्श।

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लोक

राहु केतु कैसे बने?

स्वर्भानु का सिर राहु और धड़ केतु बना, क्योंकि अमृत पीने के बाद विष्णु ने उसे काट दिया।

#राहु केतु#स्वर्भानु#सुदर्शन चक्र
नवग्रहों का देव स्वरूप

राहु और केतु अमर कैसे हो गए?

स्वरभानु असुर ने अमृत पान किया था — विष्णु के सुदर्शन चक्र से सिर-धड़ अलग होने पर भी अमृत के प्रभाव से सिर (राहु) और धड़ (केतु) दोनों अमर हो गए।

#राहु केतु अमर#अमृत प्रभाव#सुदर्शन चक्र
नवग्रहों का देव स्वरूप

राहु और केतु की उत्पत्ति कैसे हुई?

समुद्र मंथन में स्वरभानु असुर ने देव वेष में अमृत पान किया — सूर्य-चंद्र ने रहस्य उजागर किया, विष्णु के सुदर्शन चक्र से सिर (राहु) और धड़ (केतु) अलग हुए और अमृत के कारण दोनों अमर हो नवग्रह बने।

#राहु केतु उत्पत्ति#स्वरभानु#समुद्र मंथन
ग्रह दोष निवारण

कालसर्प दोष के लिए बटुक भैरव साधना कैसे करें?

कालसर्प दोष के लिए कालाष्टमी पर भैरव के सामने दीपक जलाकर मंत्र जपें: 'ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय। कुरु कुरु बटुकाय बं ह्रीं ॐ फट स्वाहा।'

#कालसर्प दोष#राहु#केतु
ज्योतिष दोष एवं उपाय

केतु दोष क्या है लक्षण कैसे पहचानें

केतु=वैराग्य/अचानक। लक्षण: अज्ञात समस्या, संतान कष्ट, त्वचा रोग, अत्यधिक वैराग्य, कुत्ते भय, दुर्घटना। ज्योतिषी=सटीक पहचान।

#केतु#दोष#लक्षण
ज्योतिष दोष एवं उपाय

राहु केतु दोष से कैसे बचें

राहु: दुर्गा पूजा, 'ॐ रां राहवे नमः', गोमेद, 8 मुखी रुद्राक्ष। केतु: गणेश पूजा, 'ॐ कें केतवे नमः', लहसुनिया, 9 मुखी। सार्वभौमिक: महामृत्युंजय + हनुमान + शिव।

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शिव पूजा

शिव की पूजा में राहु केतु दोष निवारण कैसे करें?

राहु: महामृत्युंजय सवा लाख जप+हवन, शिवलिंग पर काले तिल, काल भैरव पूजा। केतु: कुश से जलाभिषेक, गणेश पूजा, सप्तधान्य अर्पण। दोनों: रुद्राभिषेक, प्रदोष व्रत, 8/9 मुखी रुद्राक्ष, काल सर्प दोष हेतु त्र्यम्बकेश्वर/महाकाल पूजा। ज्योतिषी से कुंडली परामर्श उचित।

#राहु केतु#ग्रह दोष#निवारण
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