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श्रीमद्भगवद्गीता · विभूति योग

श्लोक 12

विभूति योग · Vibhuti Yoga

मूल पाठ

अर्जुन उवाच | परं ब्रह्म परं धाम पवित्रं परमं भवान् | पुरुषं शाश्वतं दिव्यमादिदेवमजं विभुम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अर्जुन बोले -- परम ब्रह्म, परम धाम और महान् पवित्र आप ही हैं। आप शाश्वत, दिव्य पुरुष, आदिदेव, अजन्मा और विभु (व्यापक) हैं -- ऐसा सब-के-सब ऋषि, देवर्षि नारद, असित, देवल तथा व्यास कहते हैं और स्वयं आप भी मेरे प्रति कहते हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अर्जुन बोले -- परम ब्रह्म, परम धाम और महान् पवित्र आप ही हैं। आप शाश्वत, दिव्य पुरुष, आदिदेव, अजन्मा और विभु (व्यापक) हैं -- ऐसा सब-के-सब ऋषि, देवर्षि नारद, असित, देवल तथा व्यास कहते हैं और स्वयं आप भी मेरे प्रति कहते हैं।

English Meaning

Arjuna said Thou art the Supreme Brahman, the supreme abode (or the supreme light), the supreme purifier, eternal, divine Person, the primeval God, unborn andn omnipresent.

Arjuna said Thou art the Supreme Brahman, the supreme abode (or the supreme light), the supreme purifier, eternal, divine Person, the primeval God, unborn andn omnipresent.

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