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श्रीमद्भगवद्गीता · विभूति योग

श्लोक 16

विभूति योग · Vibhuti Yoga

मूल पाठ

वक्तुमर्हस्यशेषेण दिव्या ह्यात्मविभूतयः | याभिर्विभूतिभिर्लोकानिमांस्त्वं व्याप्य तिष्ठसि

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिन विभूतियोंसे आप इन सम्पूर्ण लोकोंको व्याप्त करके स्थित हैं, उन सभी अपनी दिव्य विभूतियोंका सम्पूर्णतासे वर्णन करनेमें आप ही समर्थ हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जिन विभूतियोंसे आप इन सम्पूर्ण लोकोंको व्याप्त करके स्थित हैं, उन सभी अपनी दिव्य विभूतियोंका सम्पूर्णतासे वर्णन करनेमें आप ही समर्थ हैं।

English Meaning

Thou shouldst indeed tell, without reserve, of Thy divine glories by which Thou existest, pervading all these worlds. (None else can do so.)

Thou shouldst indeed tell, without reserve, of Thy divine glories by which Thou existest, pervading all these worlds. (None else can do so.)

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