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श्रीमद्भगवद्गीता · विभूति योग

श्लोक 19

विभूति योग · Vibhuti Yoga

मूल पाठ

श्री भगवानुवाच | हन्त ते कथयिष्यामि दिव्या ह्यात्मविभूतयः | प्राधान्यतः कुरुश्रेष्ठ नास्त्यन्तो विस्तरस्य मे

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्रीभगवान् बोले -- हाँ, ठीक है। मैं अपनी दिव्य विभूतियोंको तेरे लिये प्रधानतासे (संक्षेपसे) कहूँगा; क्योंकि हे कुरुश्रेष्ठ ! मेरी विभूतियोंके विस्तारका अन्त नहीं है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

श्रीभगवान् बोले -- हाँ, ठीक है। मैं अपनी दिव्य विभूतियोंको तेरे लिये प्रधानतासे (संक्षेपसे) कहूँगा; क्योंकि हे कुरुश्रेष्ठ ! मेरी विभूतियोंके विस्तारका अन्त नहीं है।

English Meaning

The Blessed Lord said Very well! Now I will declare to thee My divine glories in their prominence, O Arjuna; there is no end to their detailed description.

The Blessed Lord said Very well! Now I will declare to thee My divine glories in their prominence, O Arjuna; there is no end to their detailed description.

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