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श्रीमद्भगवद्गीता · विभूति योग

श्लोक 32

विभूति योग · Vibhuti Yoga

मूल पाठ

सर्गाणामादिरन्तश्च मध्यं चैवाहमर्जुन | अध्यात्मविद्या विद्यानां वादः प्रवदतामहम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे अर्जुन ! सम्पूर्ण सर्गोंके आदि, मध्य तथा अन्तमें मैं ही हूँ। विद्याओंमें अध्यात्मविद्या और परस्पर शास्त्रार्थ करनेवालोंका(तत्त्व-निर्णयके लिये किया जानेवाला) वाद मैं हूँ।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे अर्जुन ! सम्पूर्ण सर्गोंके आदि, मध्य तथा अन्तमें मैं ही हूँ। विद्याओंमें अध्यात्मविद्या और परस्पर शास्त्रार्थ करनेवालोंका(तत्त्व-निर्णयके लिये किया जानेवाला) वाद मैं हूँ।

English Meaning

Among creations I am the beginning, the middle and also the end, O Arjuna; among the sciences I am the science of the Self; and I am the logic among controversialists.

Among creations I am the beginning, the middle and also the end, O Arjuna; among the sciences I am the science of the Self; and I am the logic among controversialists.

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