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श्रीमद्भगवद्गीता · विभूति योग

श्लोक 8

विभूति योग · Vibhuti Yoga

मूल पाठ

अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते | इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मैं संसारमात्रका प्रभव (मूलकारण) हूँ, और मुझसे ही सारा संसार प्रवृत्त हो रहा है अर्थात् चेष्टा कर रहा है -- ऐसा मेरेको मानकर मेरेमें ही श्रद्धा-प्रेम रखते हुए बुद्धिमान् भक्त मेरा ही भजन करते हैं -- सब प्रकारसे मेरे ही शरण होते हैं।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

मैं संसारमात्रका प्रभव (मूलकारण) हूँ, और मुझसे ही सारा संसार प्रवृत्त हो रहा है अर्थात् चेष्टा कर रहा है -- ऐसा मेरेको मानकर मेरेमें ही श्रद्धा-प्रेम रखते हुए बुद्धिमान् भक्त मेरा ही भजन करते हैं -- सब प्रकारसे मेरे ही शरण होते हैं।

English Meaning

I am the source of all; from Me everything evolves; understanding thus, the wise, endowed with meditation, worship Me.

I am the source of all; from Me everything evolves; understanding thus, the wise, endowed with meditation, worship Me.

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