ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 12

विश्वरूप दर्शन योग · Vishwarupa Darshana Yoga

मूल पाठ

दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता | यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अगर आकाशमें एक साथ हजारों सूर्य उदित हो जायँ, तो भी उन सबका प्रकाश मिलकर उस महात्मा-(विराट् रूप परमात्मा-) के प्रकाशके समान शायद ही हो।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अगर आकाशमें एक साथ हजारों सूर्य उदित हो जायँ, तो भी उन सबका प्रकाश मिलकर उस महात्मा-(विराट् रूप परमात्मा-) के प्रकाशके समान शायद ही हो।

English Meaning

If the splendour of a thousand suns were to blaze out at once (simultaneously) in the sky, that would be the splendour of that mighty Being (great Soul).

If the splendour of a thousand suns were to blaze out at once (simultaneously) in the sky, that would be the splendour of that mighty Being (great Soul).

आगे पढ़ें — विश्वरूप दर्शन योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता