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श्रीमद्भगवद्गीता · विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 13

विश्वरूप दर्शन योग · Vishwarupa Darshana Yoga

मूल पाठ

तत्रैकस्थं जगत्कृत्स्नं प्रविभक्तमनेकधा | अपश्यद्देवदेवस्य शरीरे पाण्डवस्तदा

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उस समय अर्जुनने देवोंके देव भगवान् के उस शरीरमें एक जगह स्थित अनेक प्रकारके विभागोंमें विभक्त सम्पूर्ण जगत् को देखा।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

उस समय अर्जुनने देवोंके देव भगवान् के उस शरीरमें एक जगह स्थित अनेक प्रकारके विभागोंमें विभक्त सम्पूर्ण जगत् को देखा।

English Meaning

There, in the body of the God of gods, Arjuna then saw the whole universe resting in one, with its many groups.

There, in the body of the God of gods, Arjuna then saw the whole universe resting in one, with its many groups.

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