ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 26

विश्वरूप दर्शन योग · Vishwarupa Darshana Yoga

मूल पाठ

अमी च त्वां धृतराष्ट्रस्य पुत्राः सर्वे सहैवावनिपालसङ्घैः | भीष्मो द्रोणः सूतपुत्रस्तथाऽसौ सहास्मदीयैरपि योधमुख्यैः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हमारे मुख्य योद्धाओंके सहित भीष्म, द्रोण और वह कर्ण भी आपमें प्रविष्ट हो रहे हैं। राजाओंके समुदायोंके सहित धृतराष्ट्रके वे ही सब-के-सब पुत्र आपके विकराल दाढ़ोंके कारण भयंकर मुखोंमें बड़ी तेजीसे प्रविष्ट हो रहे हैं। उनमेंसे कई-एक तो चूर्ण हुए सिरोंसहित आपके दाँतोंके बीचमें फँसे हुए दीख रहे हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हमारे मुख्य योद्धाओंके सहित भीष्म, द्रोण और वह कर्ण भी आपमें प्रविष्ट हो रहे हैं। राजाओंके समुदायोंके सहित धृतराष्ट्रके वे ही सब-के-सब पुत्र आपके विकराल दाढ़ोंके कारण भयंकर मुखोंमें बड़ी तेजीसे प्रविष्ट हो रहे हैं। उनमेंसे कई-एक तो चूर्ण हुए सिरोंसहित आपके दाँतोंके बीचमें फँसे हुए दीख रहे हैं।

English Meaning

All the sons of Dhritarashtra, with the hosts of kings of the earth, Bhishma, Drona and Karna, with the chief among our warriors.

All the sons of Dhritarashtra, with the hosts of kings of the earth, Bhishma, Drona and Karna, with the chief among our warriors.

आगे पढ़ें — विश्वरूप दर्शन योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता