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श्रीमद्भगवद्गीता · विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 51

विश्वरूप दर्शन योग · Vishwarupa Darshana Yoga

मूल पाठ

अर्जुन उवाच | दृष्ट्वेदं मानुषं रूपं तवसौम्यं जनार्दन | इदानीमस्मि संवृत्तः सचेताः प्रकृतिं गतः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अर्जुन बोले -- हे जनार्दन ! आपके इस सौम्य मनुष्यरूपको देखकर मैं इस समय स्थिरचित्त हो गया हूँ और अपनी स्वाभाविक स्थितिको प्राप्त हो गया हूँ।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अर्जुन बोले -- हे जनार्दन ! आपके इस सौम्य मनुष्यरूपको देखकर मैं इस समय स्थिरचित्त हो गया हूँ और अपनी स्वाभाविक स्थितिको प्राप्त हो गया हूँ।

English Meaning

Arjuna said Having seen this Thy gentle human form, O Krishna, now I am composed and am restored to my own nature.

Arjuna said Having seen this Thy gentle human form, O Krishna, now I am composed and am restored to my own nature.

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