ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 53

विश्वरूप दर्शन योग · Vishwarupa Darshana Yoga

मूल पाठ

नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया | शक्य एवंविधो द्रष्टुं दृष्टवानसि मां यथा

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिस प्रकार तुमने मुझे देखा है, इस प्रकारका (चतुर्भुजरूपवाला) मैं न तो वेदोंसे, न तपसे, न दानसे और न यज्ञसे ही देखा जा सकता हूँ।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जिस प्रकार तुमने मुझे देखा है, इस प्रकारका (चतुर्भुजरूपवाला) मैं न तो वेदोंसे, न तपसे, न दानसे और न यज्ञसे ही देखा जा सकता हूँ।

English Meaning

Neither by the Vedas nor by austerity, nor by gift, nor by sacrifice can I be seen in this form as thou hast seen Me (so easily).

Neither by the Vedas nor by austerity, nor by gift, nor by sacrifice can I be seen in this form as thou hast seen Me (so easily).

आगे पढ़ें — विश्वरूप दर्शन योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता