ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 10

गुणत्रय विभाग योग · Gunatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

रजस्तमश्चाभिभूय सत्त्वं भवति भारत | रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे भरतवंशोद्भव अर्जुन ! रजोगुण और तमोगुणको दबाकर सत्त्वगुण सत्त्वगुण, और तमोगुणको दबाकर रजोगुण, वैसे ही सत्त्वगुण और रजोगुणको दबाकर तमोगुण बढ़ता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे भरतवंशोद्भव अर्जुन ! रजोगुण और तमोगुणको दबाकर सत्त्वगुण सत्त्वगुण, और तमोगुणको दबाकर रजोगुण, वैसे ही सत्त्वगुण और रजोगुणको दबाकर तमोगुण बढ़ता है।

English Meaning

Now Sattva arises (prevails), O Arjuna, having overpowered Rajas and Tamas; nor Rajas, having overpowered Sattva and Tamas; and now Tamas, having overpowered Sattva and Rajas.

Now Sattva arises (prevails), O Arjuna, having overpowered Rajas and Tamas; nor Rajas, having overpowered Sattva and Tamas; and now Tamas, having overpowered Sattva and Rajas.

आगे पढ़ें — गुणत्रय विभाग योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता